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Sunday, December 30, 2012

सबसे बड़े लोकतंत्र का सच.....

 सबसे बड़े लोकतंत्र का सच पिछले दिनों राजपथ की सडकों पर दिखाई दिया। यह समझ से परे था की सबसे बड़े लोकतंत्र का वासी होने पर हम खुशी मनाएं या दुखी हों। कभी कभी तो स्कूल में पढी लोकतंत्र की परिभाषा भी झूठी लगाती है। जिस देश में संसद ऐसे तालिबानी फैसले ले, जनता की जायज मांगों को अनसुना करे, जनता निरपराध सड़कों पर पिटती रहे, मरती रहे और सरकार आम आदमी और उसकी मागों को दफन करती रहे। पिछले बरस जन लोकपाल के लिए समूचा भारत सड़को  पर आ गया था किन्तु सरकार ने जनता की सुनना तो दूर उल्टा उस आन्दोलन को दबाने और तोड़ने में पूरा जोर लगाया। जिसकी परिणति यह हुई की आज न टीम अन्ना  है ना जनलोकपाल। पिछले माह सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदले के लिए संविधान ससोधन किया। देश की 80 फीसदी आवादी के साथ अन्याय। लोग सडकों पर आये, सरकारी काम काज ठप्प रहा परन्तु सरकार को सिर्फ 20 फीसदी लोगों की आवाज सुनाई दी। पुन: सोचने पर विवश हो जाना पडा की यह सरकार किसकी ही आम आदमी की या सोनिया की। पिछले दिनों दिल्ली जिसे न जाने क्या क्या और कैसा कैसा बनाने के दावे किये जा रहे हों में एक छात्रा के साथ जो क्रूर और जघन्य अपराध हुआ उससे सभी विज्ञ हैं। देश भर में  छात्र-जनता सडकों पर थी और उन पापियों को मृत्यु दंड देने के लिए सरकार से फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग कर रही थी तो सरकार मैं बैठे लोग आन्दोलन को कुचलने की तरकीब बना रहे थे। और फिर टूटा सरकार का गुस्सा आम आदम पर। कुछ फैसले जिनके लिए लोग आंदोलित हों और सरकार के कानो में जूं भी नहीं रेंगती वहीं कुछ फैसले जो नाजायज हों और सरकार तुरंत ले ले सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। वहीं सोनिया को भी कठघरे में लाते हैं (क्योंकि सरकार का रिमोट तो इन्ही के पास है और वो इसका क्रैडिट अपनी सुविधानुसार लेती भी हैं)। 
जनता  की परवाह न करते हुए-
रातों रात- राज्यसभा और लोकसभा  में पदोन्नति में आरक्षण का बिल  रातों रात- रामलीला मैदान में लाठी चार्जरातों रात- सिंगापुर का पासपोर्ट,वीसा रातो रात- लड़की की मौत की खबर भी दीरातो रात- लड़की को वापिस भी लाये रातों रत- लड़की का अंतिम संस्कार भी कर दिया रातों रात- सरकार और विपक्ष द्वारा दो-दो तमाशबीन भी तय कर लिए गए मिल-जुल कर ! कांग्रेस की और से गृह राज्यमंत्री आर.पी.एन.  सिंह और सांसद महाबल मिश्र ! भा.जा.पा. की और से विजेंदर गुप्ता और जगदीश मुखी !बस हम और आप की बात का फैसला नहीं हो सकता - रातों रात.पीड़ित लडकी के पिताजी ने कहा की मै अपने बेटी का अंतिम संस्कार अपने यूपी के बलिया जिले के अपने गाँव में गंगा नदी के किनारे करना चाहता था क्योकि मेरे खानदान का अंतिम संस्कार वही होता है ..लेकिन सरकार ने मेरी बेटी का पार्थिव शरिर अपने कब्जे में लिया .. यहाँ तक मेरे कुछ रिश्तेदारों को भी आने का इंतजार नही किया और सरकार ने ही मेरी बेटी के शव को जबरजस्ती जला दिया .. उसने कहा की मै अपने गाँव में जाकर फिर से वैदिक रीती रिवाजो से अपने बेटी के काल्पनिक शव का अंतिम संस्कार करूंगा .मेरी बेटी के जिन्दा शरीर के साथ भी जबरजस्ती की गयी फिर सरकार ने उसके शव के साथ जबरजस्ती की। वाह री सरकार ..........आम आदमी के गले में तेरा हाथ। 

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